रायपुर में कस्टम वेब एप्लीकेशन और स्केलेबल क्लाउड सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट
रायपुर के ज़्यादातर बढ़ते बिज़नेस एक साझा Excel फाइल पर चलते हैं जिसे सिर्फ़ एक आदमी समझता है, एक WhatsApp ग्रुप जहाँ फ़ैसले खो जाते हैं, और एक रजिस्टर जो सिर्फ़ कागज़ पर है। यह चलता रहता है — जब तक दो लोग एक ही लाइन न बदल दें, या शीट बनाने वाला आदमी छोड़ न दे। कस्टम वेब ऐप उसी काम को ऐसा बना देता है जिसे कई लोग एक साथ, कहीं से भी इस्तेमाल कर सकें — और रिकॉर्ड रहे कि किसने क्या बदला।
आपको क्या मिलता है
- कोड लिखने से पहले ज़रूरत का अध्ययन और क्लिक करने लायक स्क्रीन फ्लो
- फोन, टैबलेट और डेस्कटॉप — तीनों पर चलने वाला रिस्पॉन्सिव वेब ऐप
- रोल-आधारित लॉगिन, ताकि स्टाफ को वही दिखे जो दिखना चाहिए
- Excel और PDF एक्सपोर्ट सहित रिपोर्टिंग डैशबोर्ड
- रोज़ाना अपने-आप बैकअप और सुरक्षित क्लाउड डिप्लॉयमेंट
- जहाँ काम का हो वहाँ WhatsApp / SMS / ईमेल सूचना
- स्टाफ ट्रेनिंग सेशन और आसान हिंदी में लिखी यूज़र गाइड
- पूरा सोर्स कोड और डेटाबेस का स्वामित्व आपके नाम
आपके काम करने के तरीके के हिसाब से बना कस्टम वेब पोर्टल
रेडीमेड सॉफ्टवेयर आपके बिज़नेस को अपने हिसाब से बदलने पर मजबूर करता है। कस्टम सॉफ्टवेयर उल्टा करता है। हम उन्हीं लोगों के साथ बैठते हैं जो असल में काम करते हैं — काउंटर पर बैठा आदमी, पेमेंट का पीछा करने वाला, डिस्पैच पर्ची लगाने वाला — देखते हैं कि काम असल में कैसे चलता है, और वैसी ही स्क्रीन बनाते हैं। स्टाफ इसे इसलिए अपना लेता है क्योंकि यह उसे अपने रोज़ के काम जैसा लगता है, बस कागज़ी झंझट के बिना।
- आपके असली रजिस्टर और फ़ॉर्मेट से बनी स्क्रीन
- जहाँ स्टाफ को ज़रूरत हो वहाँ हिंदी + अंग्रेज़ी इंटरफ़ेस
- अप्रूवल फ्लो वैसा, जैसा आपके ऑफिस में असल में कौन मंज़ूरी देता है
- मौजूदा Excel डेटा इम्पोर्ट, ताकि शून्य से शुरू न करना पड़े
आधुनिक टेक स्टैक: React, Node.js, PostgreSQL और तेज़ API
हम उसी स्टैक पर बनाते हैं जिस पर बड़ी प्रोडक्ट कंपनियाँ काम करती हैं, किसी ऐसे पेज-बिल्डर पर नहीं जो आपको फँसा ले। इसका एक व्यावहारिक कारण है: जो हम बनाते हैं, उसे कोई भी दूसरा योग्य डेवलपर उठाकर आगे बढ़ा सकता है। रिपॉजिटरी, डेटाबेस और डिप्लॉयमेंट का एक्सेस आपको मिलता है। न वेंडर लॉक, न हर साल बढ़ता लाइसेंस शुल्क।
- React फ्रंट एंड — आम भारतीय फोन और नेटवर्क पर भी तेज़
- सही रिलेशन और रोज़ाना बैकअप वाला PostgreSQL डेटाबेस
- रो-लेवल सिक्योरिटी, ताकि एक क्लाइंट दूसरे का डेटा कभी न देख सके
- Tally, पेमेंट गेटवे या डिलीवरी पार्टनर से जुड़ने को तैयार API
धीमी स्प्रेडशीट की जगह ऑटोमैटिक क्लाउड डैशबोर्ड
स्प्रेडशीट की असली कीमत फाइल नहीं है — वह घंटे हैं जो हर महीने कोई वही आंकड़े दोबारा टाइप करने में लगाता है, और वे फ़ैसले हैं जो इसलिए रुके रहते हैं क्योंकि किसी के पास ताज़ा आंकड़ा नहीं है। जब डेटा एक जगह रहता है, तो रिपोर्ट उसी का एक व्यू भर होती है। मालिक को शुक्रवार को पिछले महीने का सारांश नहीं, फोन पर आज की स्थिति मिलती है।
- लाइव ओनर डैशबोर्ड — बिक्री, बकाया, स्टॉक, स्टाफ गतिविधि
- तय समय पर WhatsApp या ईमेल पर अपने-आप जाने वाली रिपोर्ट
- ऑडिट ट्रेल: हर रिकॉर्ड किसने बनाया, बदला या हटाया
- चार लैपटॉप के बीच घूमती "final_final_v3.xlsx" से छुटकारा
यह कैसे चलता है
निःशुल्क प्रोसेस डिस्कवरी कॉल
हम देखते हैं कि आज आप क्या करते हैं, कहाँ अटकता है, और कौन सी एक समस्या सबसे ज़्यादा भारी पड़ रही है। कभी-कभी सच्चा जवाब यह होता है कि अभी आपको कस्टम सॉफ्टवेयर की ज़रूरत नहीं — हम वह भी कह देते हैं।
स्क्रीन फ्लो और तय कोटेशन
डेवलपमेंट शुरू होने से पहले आप असली स्क्रीन क्लिक करने लायक प्रोटोटाइप में देखते और मंज़ूर करते हैं। कोटेशन उसी स्कोप पर तय होता है — कोई खिसकता आंकड़ा नहीं।
दिखने वाले चरणों में निर्माण
डेवलपमेंट दो-दो हफ़्ते के चरणों में चलता है, और हर चरण के अंत में एक चलता हुआ लिंक मिलता है जिसे आप खोलकर जाँच सकते हैं। तीन महीने तक कुछ देखने का इंतज़ार नहीं करना पड़ता।
लॉन्च, ट्रेनिंग और सपोर्ट
हम आपका मौजूदा डेटा माइग्रेट करते हैं, स्टाफ को हिंदी में ट्रेनिंग देते हैं, और शुरुआती एक महीने लाइव इस्तेमाल के दौरान कॉल पर उपलब्ध रहते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
यह लगभग पूरी तरह इस पर निर्भर करता है कि ऐप में कितनी अलग स्क्रीन और कितने यूज़र रोल चाहिए। एक सीमित इंटरनल टूल — एक टीम, गिनी-चुनी स्क्रीन — उस मल्टी-ब्रांच सिस्टम से बिल्कुल अलग प्रोजेक्ट है जिसमें इन्वेंटरी, अकाउंट्स और कस्टमर लॉगिन हों। डिस्कवरी कॉल के बाद हम तय स्कोप पर लिखित फिक्स्ड कोटेशन देते हैं, ताकि आपके सामने असली आंकड़ा हो, खिसकता हुआ घंटे का अनुमान नहीं।
हाँ। अंतिम भुगतान पर रिपॉजिटरी, डेटाबेस और डिप्लॉयमेंट अकाउंट आपके नाम ट्रांसफर कर दिए जाते हैं। इस बाज़ार में यह आम चलन नहीं है और हम इसे खास तौर पर निभाते हैं — जो सॉफ्टवेयर आप किसी दूसरे डेवलपर के पास ले ही न जा सकें, वह असल में आपका है ही नहीं।
ज़्यादातर मामलों में हाँ। हम उन फ़ॉर्मेट में इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट कर सकते हैं जिन्हें Tally पढ़ता है, और किसी भी ऐसे सिस्टम से जुड़ सकते हैं जो API या तय समय पर डेटा फाइल देता हो। जहाँ सिस्टम पूरी तरह बंद हो, वहाँ हम नियंत्रित इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट प्रक्रिया बना देते हैं — उतना सुंदर नहीं, पर दोनों सिस्टम बिना दोबारा टाइप किए तालमेल में रहते हैं।
लॉन्च के बाद पहले महीने के छोटे सुधार और समायोजन शामिल हैं — नए सिस्टम में कुछ न कुछ लगता ही है। उसके बाद आप या तो ज़रूरत पड़ने पर बदलाव खरीद सकते हैं, या मासिक सपोर्ट रिटेनर ले सकते हैं जिसमें होस्टिंग, बैकअप, निगरानी और हर महीने तय मात्रा में बदलाव का काम शामिल रहता है।
हाँ। डेवलपमेंट, रिव्यू कॉल और ट्रेनिंग — सब रिमोट चलता है, और हम पूरे भारत के क्लाइंट के साथ काम करते हैं। रायपुर में होने का बस इतना मतलब है कि स्थानीय क्लाइंट को ज़रूरत पड़ने पर डिस्कवरी और स्टाफ ट्रेनिंग के लिए आमने-सामने विज़िट भी मिल जाती है।
कॉल सेंटर नहीं, सीधे इंजीनियर से बात करें
अपनी ड्रॉइंग, प्लॉट के कागज़ या ज़रूरत WhatsApp पर भेजें। आपको लिखित स्कोप और तय कोटेशन मिलेगा — प्रायः 24 घंटे के भीतर।